“खबर की तहतक” वेब पोर्टल संवाददाता – विकास देवर्षि जीवित्पुत्रिका व्रत पर माताओं ने रखा निर्जला उपवास, संतान के सुखद भविष्य और आरोग्य के लिए की प्रार्थना जलालपुर, अम्बेडकर नगर। संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना से माताओं द्वारा रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) शनिवार को जलालपुर में श्रद्धा और आस्था के वातावरण में संपन्न हुआ। स्थानीय श्री शीतला माता मठिया मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। दिन चढ़ने के साथ मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। https://khabarkitahtak.co.in/wp-content/uploads/2026/10/VID-20261004-WA0005.mp4 व्रती महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ माता शीतला की पूजा-अर्चना की। संतान की सलामती और दीर्घायु की कामना करते हुए महिलाओं ने मंगलगीत गाए तथा धार्मिक कथाओं का श्रवण एवं वाचन किया। मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का ऐसा वातावरण रहा, मानो हर प्रार्थना के केंद्र में सिर्फ एक ही कामना हो—संतान सदैव स्वस्थ रहे और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे। https://khabarkitahtak.co.in/wp-content/uploads/2026/10/VID-20261004-WA0004.mp4 जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं की ममता, त्याग और संतान के प्रति अटूट स्नेह से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और आरोग्य की कामना करती हैं। माता शीतला को आरोग्य एवं स्वास्थ्य से जुड़ी देवी के रूप में भी श्रद्धा से पूजा जाता है। https://khabarkitahtak.co.in/wp-content/uploads/2026/10/VID-20261004-WA0003.mp4 मंदिर में मौजूद महिलाओं ने धार्मिक आस्था के साथ माता शीतला से अपने बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की। कई माताओं के लिए यह व्रत केवल परंपरा नहीं, बल्कि अपनी संतान के प्रति ममता और समर्पण की भावनात्मक अभिव्यक्ति भी रहा। व्रत का पारण अगले दिन सुबह निर्धारित धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जाएगा। इस अवसर पर सभासद रुक्मणी मिश्रा, नगर कोषाध्यक्ष रंजू बिंद, कंचन निषाद, रोशनी यादव, सरोज देवी, फूलमती एवं रंजना देवी सहित अन्य श्रद्धालु महिलाएं मौजूद रहीं। आस्था के साथ जुड़ा है मातृत्व का भाव जीवित्पुत्रिका व्रत के दौरान मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर यह भाव सामने रखा कि भारतीय धार्मिक परंपराओं में मां की ममता और संतान के प्रति उसका समर्पण कितना गहरा है। अपनी संतान के सुख और दीर्घायु के लिए व्रती महिलाओं की प्रार्थनाओं में जहां धार्मिक आस्था दिखाई दी, वहीं मातृत्व की गहरी संवेदना भी महसूस हुई। खबर की तहतक के लिए यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन माताओं की भावनाओं का प्रतीक रहा, जिनकी हर प्रार्थना में अपने बच्चों की मुस्कान, स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना शामिल रही। डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं का उल्लेख संबंधित परंपराओं के संदर्भ में किया गया है। पाठकों से आग्रह है कि वे किसी भी धार्मिक मान्यता को अपनी व्यक्तिगत आस्था एवं परंपरा के अनुरूप समझें। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation स्वर्गीय शारदा प्रसाद त्रिपाठी की जयंती पर वृद्धजनों के बीच पहुंचेगा सेवा का संदेश