हमीरपुर में फर्जी GST अधिकारी बनकर ट्रक रोकने का आरोप, चार गिरफ्तार

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

हमीरपुर

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने हाईवे पर मालवाहक वाहनों की सुरक्षा और फर्जी अधिकारियों के नाम पर होने वाली कथित वसूली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने कथित तौर पर खुद को GST अधिकारी बताकर एक मालवाहक वाहन को रोका और चालक से 50 हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि इस दौरान चालक से 11 हजार रुपये नकद भी ले लिए गए। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया। दो अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

ई-वे बिल और टैक्स इनवॉइस से बनाया भरोसे का जाल

रिपोर्ट के मुताबिक वाहन लखनऊ से महोबा की ओर रसोई संबंधी सामान लेकर जा रहा था। हमीरपुर बाईपास के पास कथित रूप से कुछ लोगों ने वाहन को रोककर स्वयं को GST विभाग का अधिकारी बताया।

मामला तब संदिग्ध हुआ जब माल के मालिक ने कथित GST जांच की वास्तविकता की पुष्टि करने का प्रयास किया। संबंधित कर अधिकारी द्वारा मौके की जानकारी जुटाने पर पता चला कि वहां अधिकृत GST जांच नहीं चल रही थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि आरोपियों ने ट्रक के ई-वे बिल और टैक्स इनवॉइस में मौजूद वास्तविक जानकारियों का इस्तेमाल कर कथित फर्जी जांच को विश्वसनीय दिखाने की कोशिश की।

फर्जी पहचान पत्र और मोबाइल बरामद

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों के पास से कथित फर्जी GST पहचान पत्र, मोबाइल फोन और SIM कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस पूरे मामले में एक संगठित तरीके से ट्रकों और उनके माल की जानकारी जुटाकर उन्हें रोकने तथा कथित तौर पर रकम मांगने की बात सामने आई है।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं और पहले ऐसी कितनी घटनाएं हुई हैं।

जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच

यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क पर किसी सरकारी अधिकारी के नाम पर वाहन रोकने और दस्तावेजों की जानकारी का इस्तेमाल करने से आम वाहन चालकों और व्यापारियों में भ्रम पैदा हो सकता है।

हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी और बरामदगी की जानकारी दी है, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी। गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने तक आरोपी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

खबर की तहतक अपने पाठकों से अपील करता है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर जांच या वसूली की कोशिश करे तो उसकी पहचान और विभागीय प्रामाणिकता की पुष्टि किए बिना कोई भुगतान न करें और तत्काल संबंधित विभाग अथवा पुलिस को सूचना दें।

डिस्क्लेमर:

यह समाचार 27 सितंबर 2026 को उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी और पुलिस द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में वर्णित आरोप पुलिस जांच के विषय हैं और इन्हें न्यायालय द्वारा सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद तथ्य एवं कानूनी स्थिति में परिवर्तन संभव है।

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