बरियावन में मकान जमींदोज मामले में अकबरपुर कोतवाल संतोष कुमार सिंह निलंबित

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

20 सितंबर की रात जेसीबी से कई मकान गिराए जाने के मामले में पुलिस अधीक्षक की बड़ी कार्रवाई, विभागीय जांच प्रस्तावित

अम्बेडकरनगर।

अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के बरियावन बाजार में 20 सितंबर 2026 की रात जेसीबी से कई मकानों को गिराए जाने के मामले ने अब गंभीर प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई का रूप ले लिया है। घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक ने अकबरपुर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी प्रस्तावित की गई है।

पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार, 20 सितंबर की रात रामकिशोर पुत्र रामआसरे निवासी बरियावन थाना अकबरपुर तथा अन्य पांच-छह व्यक्तियों के मकानों को जेसीबी से गिराए जाने की घटना सामने आई थी। मामले में थाना अकबरपुर में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि घटना की जानकारी होने के बावजूद प्रभारी निरीक्षक द्वारा अपने कर्तव्यों का अपेक्षित रूप से निर्वहन नहीं किया गया। पुलिस अधीक्षक के स्थलीय पर्यवेक्षण के दौरान पुलिस की भूमिका में शिथिलता पाए जाने का उल्लेख आदेश में किया गया है।

आदेश के मुताबिक, पर्यवेक्षणीय लापरवाही के कारण घटना को अंजाम दिया जा सका। इसे प्रभारी निरीक्षक के कर्तव्यों एवं आचरण के प्रति गंभीर लापरवाही का परिचायक माना गया है।

इसी आधार पर उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की दंड एवं अपील नियमावली-1991 के नियम 17(1)(क) के तहत प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह को निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में पुलिस लाइन से संबद्ध रहेंगे

निलंबन अवधि के दौरान प्रभारी निरीक्षक को पुलिस लाइन अम्बेडकरनगर से संबद्ध किया गया है। आदेश के अनुसार वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा तथा इसके लिए निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।

हल्का लेखपाल भी कार्रवाई के घेरे में

बरियावन प्रकरण में हल्का लेखपाल के निलंबन की भी सूचना सामने आई है। यदि संबंधित विभागीय आदेश में यह कार्रवाई आधिकारिक रूप से पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल पुलिस स्तर की लापरवाही तक सीमित न रहकर राजस्व विभाग की भूमिका की जांच तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है।

ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि मकानों को गिराए जाने से पहले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरे मामले की जानकारी कब मिली, मौके पर किस स्तर की कार्रवाई की गई और विवादित संपत्तियों के संबंध में उपलब्ध अभिलेखों एवं आदेशों का किस प्रकार परीक्षण किया गया।

अब जांच में सामने आएगा सच

बरियावन की घटना ने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, संपत्ति और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय करने का अधिकार विभागीय जांच एवं सक्षम प्राधिकारी को है।

अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि स्थानीय पुलिस को घटना की जानकारी कब मिली, मौके पर पुलिस की क्या भूमिका रही, समय रहते क्या कदम उठाए गए और घटना को रोकने के लिए उपलब्ध प्रशासनिक एवं कानूनी साधनों का कितना इस्तेमाल किया गया।

खबर की तहतक इस पूरे मामले में सामने आए आधिकारिक आदेशों, पुलिस कार्रवाई और जांच की प्रगति पर तथ्यपरक नजर बनाए रखेगा। जांच में जो तथ्य आधिकारिक रूप से सामने आएंगे, उन्हें उसी आधार पर पाठकों तक पहुंचाया जाएगा।डिस्क्लेमर:

डिस्क्लेमर:

यह समाचार उपलब्ध पुलिस/प्रशासनिक जानकारी एवं संबंधित आदेश में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। मकान गिराए जाने की घटना, पुलिस की कथित लापरवाही तथा अन्य संबंधित आरोपों/जिम्मेदारियों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि इस समाचार का उद्देश्य नहीं है। निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है, इसे किसी व्यक्ति के विरुद्ध अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। हल्का लेखपाल के निलंबन से संबंधित जानकारी को संबंधित आधिकारिक आदेश उपलब्ध होने पर ही अंतिम रूप से पुष्ट तथ्य माना जाएगा। संबंधित पक्ष को जांच एवं विधिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।

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