खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क जलालपुर, अंबेडकरनगर। ग्राम सभा गौसपुर ककरहिया में पुल के पास जल शक्ति मिशन की पाइपलाइन में लगातार हो रहे लीकेज को लेकर अब आईजीआरएस शिकायत के कथित गलत निस्तारण का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित कर्मचारियों पर बिना मौके का निरीक्षण किए और शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना शिकायत का निस्तारण करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पाइपलाइन लीकेज की समस्या अभी भी मौके पर बनी हुई है। इसके बावजूद आईजीआरएस पोर्टल पर ऐसी रिपोर्ट लगाई गई, जिसमें शिकायत के निस्तारण के साथ शिकायतकर्ता से फीडबैक लिए जाने और उसके संतुष्ट होने का उल्लेख किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, मुसीबत अली और अभिषेक वर्मा में से किसी ने भी उससे संपर्क नहीं किया। उसका दावा है कि न तो मौके पर उससे मुलाकात की गई और न ही फोन पर शिकायत के संबंध में बातचीत हुई। शिकायतकर्ता ने पाइपलाइन लीकेज की वर्तमान स्थिति की जीपीएस कैमरे से रिकॉर्ड की गई तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध होने की बात भी कही है। https://khabarkitahtak.co.in/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260909-WA0019.mp4 सवाल पूछने पर सामने आया ‘गलती’ का मामला? शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब उसने इस संबंध में अभिषेक वर्मा से सवाल किया तो बातचीत के दौरान पहले यह कहा गया कि संभवतः गलती हो गई होगी। शिकायतकर्ता द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने स्वयं शिकायतकर्ता से फोन पर बात की थी, उनके द्वारा कथित तौर पर बताया गया कि उन्होंने बात नहीं की थी और संभव है कि मुसीबत अली ने बातचीत की हो। बाद में शिकायतकर्ता का कहना है कि मुसीबत अली की ओर से भी कोई संपर्क किए जाने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद अभिषेक वर्मा ने कथित तौर पर गलती स्वीकार करते हुए शिकायतकर्ता से मिलने की बात कही। हालांकि, इन आरोपों और बातचीत के दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। अब सबसे बड़ा सवाल आईजीआरएस निस्तारण पर मामले में सवाल यह है कि यदि शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं किया गया था, तो आईजीआरएस निस्तारण रिपोर्ट में उसकी संतुष्टि किस आधार पर दर्ज की गई? यदि मौके पर पाइपलाइन लीकेज की समस्या मौजूद थी, तो शिकायत को किस आधार पर निस्तारित बताया गया? यही वे सवाल हैं जिनका जवाब निष्पक्ष जांच और संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से सामने आ सकता है। उच्चस्तरीय जांच की मांग शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से शिकायत की है। साथ ही उसने अभिषेक वर्मा, मुसीबत अली, ब्लॉक हेड तीरथ यादव, संबंधित साइट इंजीनियर, ठेकेदार तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों के विपरीत कार्रवाई या गलत रिपोर्टिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। ‘गलती’ या व्यवस्था पर गंभीर सवाल? आईजीआरएस जैसी शिकायत निवारण व्यवस्था का उद्देश्य जनता की शिकायतों का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि किसी शिकायत का निस्तारण बिना वास्तविक समाधान या शिकायतकर्ता की वास्तविक संतुष्टि के किया गया हो, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय बनता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में वास्तविकता क्या सामने आती है और यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है—या फिर पूरा मामला महज ‘गलती हो गई’ कहकर समाप्त कर दिया जाता है। खबर की तहतक इस मामले में संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगी। डिस्क्लेमर: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी, उसके आरोपों तथा उसके द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदार अथवा अन्य व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि इस समाचार के प्रकाशन के समय तक नहीं हुई है। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना समाचार का उद्देश्य नहीं है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित विभाग अथवा आरोपित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाएगा। यदि जांच में आरोप असत्य पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष के स्पष्टीकरण को भी उचित स्थान दिया जाएगा। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation सात साल की मासूम से दुष्कर्म का आरोप, 14 वर्षीय किशोर फरार वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का किया शुभारंभ