गुरु ही ज्ञान की वह ज्योति हैं, जिससे राष्ट्र का भविष्य होता है उज्ज्वल : अशोक पांडे

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

जलालपुर, अंबेडकरनगर।

शिक्षक केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाला वह शिल्पकार है, जिसके हाथों में आने वाली पीढ़ियों की दिशा और दशा दोनों होती हैं। इसी भाव के साथ ज्ञान स्मारक महाविद्यालय आलमपुर अमरतल में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नवजोत इंटर कॉलेज हजपुरा, अंबेडकरनगर के पूर्व प्रधानाचार्य अशोक पांडे ने दीप प्रज्वलित कर तथा भारत के महान शिक्षाविद एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर समारोह का शुभारंभ किया।

मुख्य अतिथि अशोक पांडे ने सनातन वैदिक परंपरा में गुरु के महत्व और गुरु-शिष्य संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक और शिष्य समाज एवं राष्ट्र के निर्माता हैं। दोनों के सम्मिलित प्रयासों से ही समृद्ध और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने शिक्षकों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करने तथा विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।

बाबा बरुआ दास इंटर कॉलेज बाकरगंज के पूर्व प्रधानाचार्य शत्रुघ्न लाल ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान परंपरा में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरुजनों और बड़ों की आज्ञा का पालन करना तथा उनका सम्मान करना शिष्यों का पवित्र कर्तव्य है। गुरु के मार्गदर्शन से प्राप्त ज्ञान ही विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा देकर उसे उज्ज्वल भविष्य और सफलता के शिखर तक पहुंचा सकता है।

वहीं, विशिष्ट अतिथि एवं बाबा बरुआ दास इंटर कॉलेज बाकरगंज के पूर्व प्रधानाचार्य विजय प्रजापति ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन, शिक्षा तथा शिक्षक के रूप में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्हें महान दार्शनिक, चिंतक, विचारक और राष्ट्रनेता बताते हुए विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के संरक्षक प्रोफेसर आई. जे. सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में प्राचीन गुरुकुल परंपरा से लेकर आधुनिक शिक्षा प्रणाली तक श्रेष्ठ गुरुओं के योगदान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में शिक्षा के स्वरूप में भले परिवर्तन आया हो, लेकिन गुरु का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. मनोज प्रजापति ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की गृह विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रियंका श्रीवास्तव, समाजशास्त्र विभाग की प्रभारी नेहा सिंह, कार्यालय प्रभारी विकास सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।

शिक्षक दिवस के अवसर पर छात्राओं ने केक काटकर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को उल्लास और उत्साह के साथ मनाया। समारोह में शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया।

कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्रबंधक डॉ. पुष्पा सिंह ने सभी अतिथियों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर संस्कृत विद्यालय सिकंदरपुर के प्रबंधक श्री अग्रसेन सहित बड़ी संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहे।

गुरु के सम्मान का संदेश

समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिकता की दौड़ में शिक्षा के साधन भले बदल गए हों, लेकिन गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और ज्ञान के प्रति समर्पण की परंपरा आज भी समाज की सबसे मजबूत नींव है।

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