खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क संवाददाता – विकास देवर्षि जलालपुर, अंबेडकरनगर। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बुधवार को जलालपुर तहसील क्षेत्र में ललही छठ यानी हलषष्ठी पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। मंदिर परिसरों में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। माताओं ने अपनी संतान की सुख-समृद्धि, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना करते हुए व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुबह स्नान के बाद महिलाओं ने पारंपरिक परिधान धारण कर मंदिरों का रुख किया। पूजा स्थल पर कुश की गांठ बांधकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान बलराम और माता षष्ठी की आराधना की गई। इस दौरान महिलाओं ने लोकगीत और भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दही, महुआ और तिन्नी के चावल का विशेष महत्व ललही छठ के व्रत में स्थानीय परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रती महिलाएं खेत में हल से उगे अनाज तथा सामान्य फलों का सेवन नहीं करतीं। पूजा और व्रत की परंपरा में दही, महुआ और तिन्नी के चावल का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। ग्रामीण अंचलों में यह पर्व मातृत्व की श्रद्धा और संतान के प्रति ममता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान बलराम के हल और मुसल से जुड़े होने के कारण इस पर्व को हलषष्ठी या हल छठ के नाम से भी जाना जाता है। आस्था के रंग में रंगे मंदिर परिसर दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाओं ने शाम को विधिवत पूजन-अर्चन किया और इसके पश्चात व्रत का पारण किया। क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामूहिक रूप से पर्व में भाग लिया। एक महिला व्रती ने कहा, “यह पर्व हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। हम हर वर्ष श्रद्धा के साथ व्रत रखकर अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं।” ललही छठ के अवसर पर मंदिर परिसर पारंपरिक गीतों, भजनों और महिलाओं की आस्था से सराबोर नजर आए। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पर्व ने ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक लोक आस्था की जीवंत तस्वीर पेश की। डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय स्तर से प्राप्त जानकारी और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख आस्था एवं परंपरा के संदर्भ में किया गया है। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation रोज गुजरते हैं सैकड़ों राहगीर, जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी? आबादी की जमीन पर 400 मीटर दूर रहने वाले व्यक्ति का दावा, महिलाओं ने सुनाई परेशानी की दास्तान