दो लाख की लूट की सूचना निकली झूठी, जमीन के पैसे देने से बचने के लिए रची गई कहानी! पुलिस जांच में खुला पूरा मामला

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

जलालपुर, अंबेडकरनगर

“बोलेरो सवार तीन लोगों ने मुझे पीटा, बैग से दो लाख रुपये छीन लिए और मोबाइल तोड़ दिया…”

रात के सन्नाटे में 112 पर आई इस सूचना ने पुलिस को सक्रिय कर दिया। मामला गंभीर था—मारपीट, दो लाख रुपये की कथित लूट और मोबाइल तोड़ने का आरोप। सूचना के आधार पर थाना जलालपुर में देर रात दो लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया।

लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने मामले की परतें खोलनी शुरू कीं, कहानी कुछ और ही सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, घटना को गंभीरता से लेते हुए टीम ने CCTV फुटेज, CDR, चश्मदीद गवाहों और वादी के लिखित स्पष्टीकरण समेत उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। जांच के दौरान कथित लूट की घटना के समर्थन में तथ्य नहीं मिले।

जमीन के पैसे देने के लिए मांगा समय, इसलिए दी गलत सूचना

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता नीरज कुमार यादव पुत्र दशरथ यादव, निवासी कोल, थाना फूलपुर, जनपद आजमगढ़ ने 28 अगस्त 2026 की रात करीब 9:06 बजे डायल-112 पर सूचना दी थी कि बोलेरो सवार तीन लोगों ने उसके साथ मारपीट कर बैग से दो लाख रुपये छीन लिए और उसका मोबाइल तोड़ दिया।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस का कहना है कि कथित लूट की घटना वास्तविक नहीं थी।

पुलिस के मुताबिक, वादी ने बैनामा कराई गई जमीन की रकम तत्काल न देनी पड़े और उसे कुछ अतिरिक्त समय मिल सके, इसी उद्देश्य से कथित लूट की गलत सूचना दी।

पुलिस जांच के बाद सामने आया दूसरा चेहरा

जिस घटना ने कुछ समय के लिए लूट की आशंका पैदा कर दी थी, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के अनुसार वह कथित रूप से मनगढ़ंत सूचना निकली। पुलिस ने मामले का खंडन करते हुए नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा करता है कि आपातकालीन सेवा पर दी गई सूचना कितनी जिम्मेदारी से दी जानी चाहिए। किसी वास्तविक पीड़ित की मदद के लिए बनाए गए तंत्र को गलत सूचना मिलने पर अनावश्यक रूप से संसाधन और समय खर्च करना पड़ सकता है।

फिलहाल पुलिस द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डिस्क्लेमर:

यह खबर पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर आधारित है। आरोपों एवं पुलिस निष्कर्षों की अंतिम कानूनी पुष्टि सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन होगी। “खबर की तहतक” किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता।

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