खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क भोपाल/नेपाल नेपाल के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गोसाईकुंड की यात्रा पर निकले एक ही परिवार के 29 रिश्तेदारों के अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद लापता होने की खबर ने परिजनों को भीतर तक झकझोर दिया है। जिस यात्रा पर परिवार के लोग आस्था और उम्मीद लेकर निकले थे, वही यात्रा अब उनके अपनों के लिए चिंता, इंतजार और अनिश्चितता की ऐसी कहानी बन गई है, जिसका हर पल बेहद भारी गुजर रहा है। बताया जा रहा है कि लापता श्रद्धालु आपस में बेहद करीबी रिश्तेदार हैं। इनमें जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी समेत एक ही कुनबे के कई सदस्य शामिल हैं। पूर्णिमा के पावन अवसर पर दर्शन के लिए निकले इन श्रद्धालुओं को शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि कुछ ही समय बाद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करना पड़ेगा। भोजन-सामान तक छोड़कर भागे, पहाड़ पर मकान की छत बनी आखिरी पनाह परिजनों के मुताबिक, अचानक आई बाढ़ की सूचना के बाद श्रद्धालुओं ने अपनी जान बचाने के लिए भोजन और सामान तक वहीं छोड़ दिया और सुरक्षित स्थान की तलाश में पहाड़ी क्षेत्र की ओर भागे। बताया गया कि उन्होंने एक मकान की छत पर शरण ली। इसी दौरान यात्रियों ने फोन कर परिजनों को बताया कि जिस बस से वे यात्रा पर आए थे, वह उफनते पानी में बह चुकी है और हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। आखिरी फोन कॉल… फिर खामोशी परिवार की सदस्य देवकी अधिकारी के मुताबिक, बीते दिन सुबह करीब 9:30 बजे लापता यात्रियों से आखिरी बार बातचीत हुई थी। बताया गया कि फोन पर उनकी आवाज में डर साफ महसूस किया जा सकता था। परिजनों के अनुसार, उन्होंने बताया कि मकान में पानी तेजी से भर रहा है और हालात उनके नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। इसी बातचीत के दौरान परिवार को सबसे ज्यादा झकझोर देने वाले शब्द सामने आए—बच्चों का ख्याल रखने की बात। फिर अचानक दूसरी तरफ से आवाज आनी बंद हो गई। कॉल तत्काल डिस्कनेक्ट नहीं हुआ, लेकिन आवाज का खामोश हो जाना परिजनों के लिए किसी भयावह आशंका से कम नहीं था। उसके बाद से 29 लोगों से संपर्क नहीं हो सका है। 29 अपनों का इंतजार… हर फोन की घंटी देती है उम्मीद एक साथ परिवार के इतने लोगों के लापता होने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है। किसी को उम्मीद है कि शायद उनके अपने किसी सुरक्षित स्थान पर हों और जल्द वापस लौट आएं, तो किसी के मन में अनहोनी की आशंका लगातार दस्तक दे रही है। फिलहाल लापता श्रद्धालुओं की तलाश और उनकी वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। परिजन हर गुजरते पल के साथ अपनों की सलामती की खबर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। एक परिवार के 29 रिश्ते… 29 जिंदगियां… और हर घर में एक ही सवाल—आखिर हमारे अपने कहां हैं? डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी एवं परिजनों के कथनों के आधार पर तैयार की गई है। लापता श्रद्धालुओं की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित नेपाली प्रशासन/राहत एजेंसियों द्वारा किए जाने के बाद ही अंतिम तथ्य स्पष्ट होंगे। “खबर की तहतक” अपुष्ट दावों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation अकबरपुर तहसील को मिली नई तहसीलदार, दिव्या भारती वर्मा ने संभाली कमान दो लाख की लूट की सूचना निकली झूठी, जमीन के पैसे देने से बचने के लिए रची गई कहानी! पुलिस जांच में खुला पूरा मामला