खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क जलालपुर, अम्बेडकरनगर। जमीन का मामला हो और वह भी संयुक्त गाटे का, तो अक्सर असली लड़ाई मिट्टी से ज्यादा हिस्सेदारी की रेखा पर होती है। तहसील जलालपुर क्षेत्र के ग्रामसभा गौराकमाल में गाटा संख्या 263/0.060 में कथित निर्माण को लेकर ऐसा ही विवाद सामने आया है। मामले में गांव निवासी इसराजी देवी पत्नी स्वर्गीय सन्ते ने उपजिलाधिकारी जलालपुर को प्रार्थना पत्र देकर हस्तक्षेप और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, उक्त गाटा संयुक्त यानी मिलजुमला भूमि है। आवेदिका ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष के रूप में नामित लालता पुत्र रामफेर, सतनारायण पुत्र लालता और विनोद पुत्र लालता अपने हिस्से से अधिक भूमि पर कब्जा कर निर्माण कराने का प्रयास कर रहे हैं। आवेदिका का कहना है कि कथित निर्माण को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई और संबंधित लोगों को रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखने का आरोप है। उनका कहना है कि मामला केवल निर्माण का नहीं, बल्कि संयुक्त भूमि में किसका कितना हिस्सा है और मौके पर कौन कितना कब्जा कर रहा है, इससे जुड़ा है। ‘हिस्सा कागज पर या जमीन पर?’ संयुक्त गाटे की सबसे बड़ी पेचीदगी यही होती है कि कागज पर हिस्सेदारी कुछ और हो सकती है और जमीन पर बनी दीवारें कुछ और कहानी कह सकती हैं। इसी आशंका के चलते आवेदिका ने प्रशासन से मौके की जांच कराने की मांग की है। प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि राजस्व अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराया जाए तथा जांच पूरी होने तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य रोका जाए। साथ ही सभी सहखातेदारों के वैधानिक हिस्से को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। मामले में फिलहाल किसी पक्ष के दावे को प्रशासनिक जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। यह शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोप और मांगों पर आधारित मामला है। विपक्षी पक्ष का पक्ष सामने आने तथा राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। अब राजस्व जांच पर टिकी नजर प्रार्थना पत्र 25 अगस्त 2026 को दिया गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन मामले में मौके की जांच और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद क्या कदम उठाता है। क्योंकि संयुक्त जमीन में सवाल सिर्फ इतना नहीं होता कि दीवार किसने उठाई, असली सवाल यह भी होता है कि दीवार उठाने की जगह उसके हिस्से में थी या नहीं। अब इसका जवाब राजस्व अभिलेख और मौके की पैमाइश ही दे सकते हैं। खबर की तह तक: मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासनिक जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation OBC जनगणना की मांग पर गरजा पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन ₹400 के खर्च पर कहासुनी के बाद महिला की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया