रामलीला मैदान में रास्ता रोकने पर विवाद, चालक पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई

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जलालपुर, अम्बेडकरनगर।

जलालपुर के रामलीला मैदान में वाहन खड़ा कर रास्ता अवरुद्ध करने और वाहन हटाने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। आरोप है कि UP 45 AT 0990 नंबर की पिकअप सड़क पर खड़ी होने से आवागमन प्रभावित हुआ। वाहन हटाने को कहने पर चालक द्वारा कथित रूप से विवाद किए जाने के बाद पुलिस को सूचना दी गई।

नौतारा निवासी संदीप यादव के अनुसार, घटना 20 अगस्त 2026 को करीब 2:50 बजे की है। उनका कहना है कि वह एक मरीज को अपनी गाड़ी से डॉक्टर को दिखाने जा रहे थे। इसी दौरान रामलीला मैदान के रास्ते में पिकअप खड़ी मिली, जिससे मार्ग बाधित हो रहा था।

संदीप यादव का आरोप है कि उन्होंने चालक से वाहन हटाने का अनुरोध किया, लेकिन चालक ने कथित तौर पर वाहन हटाने से इनकार कर दिया। आरोप है कि चालक ने कहा कि वह रामलीला समिति को ₹600 प्रतिमाह देता है, इसलिए वाहन नहीं हटाएगा और संदीप से अपनी गाड़ी पीछे करने को कहा।

संदीप के मुताबिक, पीछे वाहन करने पर ब्लॉक की ओर जाने वाला रास्ता भी प्रभावित होता। मरीज को चिकित्सक के पास ले जाने की स्थिति के बावजूद रास्ता खाली नहीं होने पर दोनों पक्षों में विवाद हुआ, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

समिति अध्यक्ष ने दावे को बताया गलत

मामले में रामलीला समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार ने वाहन चालक द्वारा समिति को ₹600 प्रतिमाह दिए जाने के दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि रामलीला मैदान के लिए समिति द्वारा किसी भी व्यक्ति, चालक अथवा अन्य से कोई धनराशि नहीं ली जाती। उन्होंने इस दावे को समिति की छवि खराब करने वाला बताया।

पुलिस ने की कार्रवाई

वहीं, कोतवाल जलालपुर के अनुसार, मामले में आरोपी चालक के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही भविष्य में सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध न करने की सख्त हिदायत दी गई है।

फिलहाल मामले में एक तरफ वाहन चालक द्वारा समिति को ₹600 प्रतिमाह देने का दावा किया गया है, जबकि समिति अध्यक्ष ने इसे पूरी तरह नकार दिया है। ऐसे में यह दावा जांच का विषय है कि आखिर वाहन खड़ा करने के पीछे वास्तविक स्थिति क्या थी और समिति को धनराशि दिए जाने का दावा कितना सही है।

खबर की तहतक: सार्वजनिक मार्ग पर वाहन खड़ा कर आवागमन बाधित करना परेशानी का कारण बन सकता है। वहीं, किसी समिति को धनराशि देने जैसे दावे को प्रमाण के बिना तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। मामले में पुलिस की कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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