हंसवर पुलिस के हत्थे चढ़ा हिस्ट्रीशीटर, 12 बोर तमंचा और दो कारतूस बरामद

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अम्बेडकरनगर।

अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत हंसवर पुलिस को बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर टीम ने एक हिस्ट्रीशीटर अभियुक्त को अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, 18 अगस्त 2026 की रात करीब 9:52 बजे चक दाउदपुर गांव के पास निर्माणाधीन पुलिया, बृहद ग्राम एकडंगी-दाऊदपुर क्षेत्र से जिलाजीत यादव पुत्र मुन्शीराम, निवासी उसका फाजिलपुर, थाना हंसवर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक 12 बोर का अवैध तमंचा और दो जिंदा 12 बोर कारतूस बरामद हुए।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त हिस्ट्रीशीटर एचएस नंबर 12ए है। बरामदगी के आधार पर थाना हंसवर में मु0अ0सं0 115/26, धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की बात कही है।

आपराधिक इतिहास भी लंबा

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार जिलाजीत यादव के खिलाफ हंसवर थाने में वर्ष 2017 से 2024 के बीच मारपीट, एससी/एसटी एक्ट, बलवा, आबकारी अधिनियम, चोरी, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में कुल 10 मुकदमे दर्ज होने का उल्लेख है। इनमें वर्ष 2022 और 2024 के आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले भी शामिल बताए गए हैं।

एसपी के निर्देशन में कार्रवाई

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सुश्री प्राची सिंह के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) हरेन्द्र कुमार एवं क्षेत्राधिकारी टांडा प्रदीप सिंह चन्देल के पर्यवेक्षण तथा थानाध्यक्ष हंसवर अभिनेष कुमार के नेतृत्व में की गई।

पुलिस टीम में उपनिरीक्षक शुभम मिश्रा, उपनिरीक्षक रवि यादव, हेड कांस्टेबल शैलेश सिंह, कांस्टेबल धीरज सिंह, अभयानन्द यादव, दीपक यादव, सनोज यादव एवं शिवम बाबू गंगवार शामिल रहे।

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डिस्क्लेमर :

यह खबर अम्बेडकरनगर पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। गिरफ्तार व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों और बरामदगी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। केवल पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने से उसे दोषी नहीं माना जा सकता। दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायालय के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करें।

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