मुख्यमंत्री जी, जलालपुर तहसीलदार की कुर्सी आखिर कब भरेगी? महीनों से रिक्त पद पर उठे सवाल

खबर की तहतक

जलालपुर, अंबेडकरनगर।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोविंद साहब मेले में प्रस्तावित आगमन से पहले जलालपुर तहसील की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जलालपुर तहसील में तहसीलदार का नियमित पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है, जबकि नायब तहसीलदार हरिराम को तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

क्षेत्र के विभिन्न गांवों और बाजारों में लोग अपने-अपने राजस्व मामलों को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। कई शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनके मामलों में समयबद्ध और निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि प्रकरणों के निस्तारण में अनियमितताएं हो रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जलालपुर जैसी महत्वपूर्ण तहसील में लंबे समय तक नियमित तहसीलदार की नियुक्ति न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लोगों का मानना है कि इससे राजस्व संबंधी कार्यों में विलंब हो रहा है और आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील स्तर पर भूमि, नामांतरण, वरासत, पैमाइश, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरणों का समय पर निस्तारण जनता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि स्थायी अधिकारी की नियुक्ति होने से प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बेहतर हो सकती है।

जनता के सवाल

– मुख्यमंत्री जी, जलालपुर तहसील को स्थायी तहसीलदार आखिर कब मिलेगा?

– क्या जिलाधिकारी अंबेडकरनगर इस मामले का संज्ञान लेकर रिक्त पद भरवाने की पहल करेंगी?

– यदि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो क्या उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी?

जलालपुर की जनता अब इस मुद्दे पर स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रही है। आने वाले दिनों में शासन और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

डिस्क्लेमर

यह समाचार स्थानीय नागरिकों, शिकायतकर्ताओं एवं क्षेत्रीय चर्चाओं से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में उल्लिखित भ्रष्टाचार, अनियमितता अथवा पक्षपात संबंधी आरोप संबंधित व्यक्तियों/अधिकारियों पर लगाए गए आरोप मात्र हैं; उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। खबर की तहतक किसी भी अपुष्ट आरोप की पुष्टि नहीं करता तथा पाठकों से तथ्यात्मक जानकारी के लिए आधिकारिक प्रशासनिक स्रोतों पर भरोसा करने का अनुरोध करता है।

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