खबर की तहतक ✍️| राज्य ब्यूरो बरेली। उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें शामली कलेक्टर कार्यालय से अटैच किया गया है। पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त, बरेली को सौंपी गई है। यह कार्रवाई उस घटनाक्रम के बाद सामने आई है, जब सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा देकर प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी। इस्तीफे से मचा था प्रशासनिक हलचल अलंकार अग्निहोत्री ने अपने सात पन्नों के इस्तीफे में प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ कथित अभद्रता का हवाला देते हुए गहरी आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा था कि वर्तमान व्यवस्था में जनतंत्र और गणतंत्र के स्थान पर “भ्रमतंत्र” दिखाई देता है। इस्तीफे में उन्होंने यूजीसी बिल का विरोध भी दर्ज कराया था। प्रयागराज की घटना को बताया गंभीर इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने उल्लेख किया कि मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों और ब्राह्मणों के साथ कथित मारपीट हुई, जिसे उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा का हनन बताया। उन्होंने स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा (2019 बैच) का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए इस प्रकरण को गंभीर और चिंताजनक करार दिया। पोस्टर के साथ तस्वीर वायरल, लगाए गंभीर आरोप सोशल मीडिया पर सिटी मजिस्ट्रेट की एक तस्वीर भी सामने आई, जिसमें वह यूजीसी कानून के विरोध में पोस्टर लिए दिखाई दिए। पोस्टर पर “यूजीसी रोल बैक” और “काला कानून वापस लो” जैसे नारे लिखे थे। इसी बीच उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि डीएम आवास पर उन्हें कथित रूप से बंधक बनाया गया, और इस दौरान लखनऊ से आए एक कॉल में अपशब्द कहे गए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के दायरे में यह बिंदु भी शामिल बताए जा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने किया समर्थन सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और निलंबन के बाद कर्मचारी कल्याण सेवा समिति सहित कुछ संगठनों ने उनके समर्थन में बयान जारी किए हैं और इस्तीफा वापस लेने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि प्रयागराज की घटना और यूजीसी कानून को लेकर उठी नाराजगी पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। निष्कर्ष बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का निलंबन प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें मंडलायुक्त स्तर की जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। खबर की तहतक राज्य की हर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई और उसके पीछे की पूरी कहानी—तथ्यों और कानून के दायरे में। Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation ओडिशा में ट्रिपल मर्डर से हड़कंप, जमीन विवाद में पति-पत्नी और बेटी की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या Bank Strike Today: आज बैंकों में हड़ताल, शाखाओं का कामकाज रहेगा प्रभावित; जरूरी बैंकिंग काम ऐसे करें घर बैठे