बहन को स्कूल छोड़कर लौट रहा था इकलौता बेटा, रास्ते में थम गई जिंदगी… पीछे छूट गया रोता-बिलखता परिवार

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

जलालपुर, अंबेडकरनगर।

जिस घर में सिर्फ दो बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां शनिवार को अचानक मातम छा गया। एक बेटी और एक बेटे वाले परिवार का इकलौता चिराग निखिल उर्फ हैप्पी उम्र लगभग (20) वर्ष अपनी छोटी बहन को स्कूल छोड़ने के बाद बाइक से घर लौट रहा था। परिवार को क्या पता था कि बहन को स्कूल छोड़ने निकला उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा।

निखिल की दर्दनाक मौत की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे से माता-पिता की उम्मीदें जुड़ी थीं, जिसकी मौजूदगी परिवार की खुशियों का हिस्सा थी, उसकी मौत ने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया। एक बहन ने अपना भाई खो दिया और माता-पिता ने अपना इकलौता बेटा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार टांडा कोतवाली क्षेत्र के मोहम्मदपुर सबूकपुर निवासी निखिल उर्फ हैप्पी (20) पुत्र प्रवीण कुमार प्रजापति शुक्रवार को अपनी छोटी बहन को स्कूल छोड़ने के बाद बाइक से वापस लौट रहा था। बताया जा रहा है कि वह अयोध्या हॉस्पिटल-जलालपुर रामगढ़ मार्ग पर अयोध्या हॉस्पिटल के सामने पहुंचा था। इसी दौरान उसकी बाइक की एक अन्य अज्ञात बाइक से हल्की टक्कर हो गई।

बताया जा रहा है कि पहली टक्कर के बाद निखिल संभल पाता, उससे पहले पीछे से आ रही एक अज्ञात पिकअप की चपेट में आ गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और सूचना परिजनों तथा पुलिस को दी गई।

जिस बहन को कुछ देर पहले स्कूल छोड़कर भाई घर लौट रहा था, शायद उसे भी यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि भाई से यह उसकी आखिरी मुलाकात थी। परिवार के लोग जब घटनास्थल पर पहुंचे तो सामने घायल पड़ा निखिल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। परिजनों ने उसे उपचार के लिए ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी सांसें थम चुकी थीं।

दो बच्चों में एक बेटा था निखिल…

परिवार में एक बेटी और एक बेटा—सिर्फ दो ही बच्चे थे। निखिल माता-पिता का इकलौता बेटा था। परिवार की उम्मीदों और भविष्य की कई तस्वीरें उससे जुड़ी थीं। लेकिन सड़क हादसे के एक दर्दनाक पल ने उन तमाम उम्मीदों को हमेशा के लिए छीन लिया।

निखिल की मौत की खबर गांव पहुंची तो हर आंख नम हो गई। घर में जहां कभी भाई-बहन की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब सिसकियां और चीख-पुकार सुनाई दे रही हैं। छोटी बहन के लिए यह सिर्फ भाई की मौत नहीं, बल्कि जिंदगी भर के लिए सिर से एक मजबूत सहारा छिन जाने जैसा है।

मृतक के पिता प्रवीण कुमार प्रजापति खाद की दुकान पर नौकरी करते हैं। जवान बेटे की मौत ने पिता को ऐसा दर्द दिया है, जिसे शायद कोई शब्द बयां नहीं कर सकते। जिस बेटे को उन्होंने भविष्य के सपनों के साथ बड़ा किया, उसी बेटे को कंधा देने की कल्पना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।

सूचना पर जलालपुर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय प्रताप सिंह यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस के अनुसार दुर्घटना में शामिल बताए जा रहे अज्ञात पिकअप और उसके चालक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना के वास्तविक कारणों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि दुर्घटना के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया।

एक भाई चला गया, एक बहन की दुनिया सूनी कर गया

निखिल की मौत का दर्द सिर्फ उसके माता-पिता तक सीमित नहीं है। उस छोटी बहन की आंखों में भी शायद अब हमेशा यह सवाल रहेगा कि जिस भाई को वह रोज अपने आसपास देखती थी, वह अचानक कहां चला गया?

वह भाई जो उसे स्कूल छोड़ने गया था, उसी भाई की अर्थी देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं।

वह बेटा जो माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बनने वाला था, आज तस्वीर बनकर रह गया।

और वह परिवार, जिसमें दो बच्चों में एक बेटा था, अब उस बेटे के बिना अधूरा हो गया।

कभी-कभी जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ सेकंड का फासला होता है। निखिल के लिए भी शायद वह सफर कुछ मिनटों का था, लेकिन उसके परिवार के लिए यह दर्द अब पूरी जिंदगी का सफर बन गया है।

डिस्क्लेमर :

यह समाचार उपलब्ध स्थानीय जानकारी एवं पुलिस कार्रवाई के आधार पर तैयार किया गया है। दुर्घटना के कारणों तथा अज्ञात पिकअप और उसके चालक की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम से संबंधित तथ्यों के आधार पर स्थिति आगे स्पष्ट हो सकती है। समाचार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि घटना और उससे जुड़े पारिवारिक दुख को तथ्यात्मक एवं संवेदनशील रूप में सामने रखना है।

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