झटका मशीन से हुई मौत के मामले में वांछित आरोपी गिरफ्तार, 60 वर्षीय कुवर अभिमन्यु श्रीवास्तव पुलिस के हत्थे चढ़ा

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

जलालपुर, अम्बेडकरनगर।

झटका मशीन से हुई मौत के मामले में जलालपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक नामजद वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुवर अभिमन्यु श्रीवास्तव पुत्र स्वर्गीय अर्जुनलाल श्रीवास्तव, निवासी ग्राम पेठिया, थाना जलालपुर के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 60 वर्ष बताई गई है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, अपराध एवं वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत 11 सितंबर 2026 को मुखबिर की सूचना पर नसोपुर भट्ठा के पास से सुबह 11:35 बजे आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी मु0अ0सं0 276/2026, धारा 105/352 बीएनएस, थाना जलालपुर से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है तथा उसे नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

मौत के मामले में कई सवाल अभी भी अहम

झटका मशीन से हुई कथित मौत के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था?

क्या झटका मशीन का इस्तेमाल निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जा रहा था?

क्या मशीन में कोई तकनीकी खराबी थी या सुरक्षा में लापरवाही हुई?

मृतक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है?

इन तमाम सवालों का अंतिम जवाब पुलिस की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस टीम ने की गिरफ्तारी

गिरफ्तारी करने वाली टीम में थाना जलालपुर के प्रभारी निरीक्षक अजय प्रताप, उपनिरीक्षक राजीव सागर, हेड कांस्टेबल मुंशीलाल यादव तथा कांस्टेबल दिनेश चौहान शामिल रहे।

खबर की तहतक की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि यह समाचार उपलब्ध पुलिस प्रेस नोट के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है। मामले की वास्तविक परिस्थितियां विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आएंगी।

डिस्क्लेमर:

यह खबर पुलिस विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रकाशित की गई है। इसमें वर्णित आरोप/घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि खबर की तहतक द्वारा नहीं की गई है। गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किए जाने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है। सभी संबंधित पक्षों का पक्ष और विवेचना में सामने आने वाले तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।

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