दुष्कर्म के मुकदमे में वांछित आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल, पैर में लगी गोली

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

अंबेडकरनगर।

थाना भीटी क्षेत्र में बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में वांछित चल रहे आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम की शनिवार को मुठभेड़ हो गई। पुलिस के अनुसार घेराबंदी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लग गई। घायल आरोपी को उपचार के लिए सीएचसी भीटी भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 को थाना भीटी क्षेत्र में एक बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। मामले में थाना भीटी पर अपराध संख्या 206/2026 के तहत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान शिबू खान पुत्र रफीक खान, निवासी ग्राम लमहैया, थाना हैदरगंज का नाम प्रकाश में आया। इसके बाद पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार तलाश कर रही थी।

सूचना मिलते ही पुलिस ने घेरा

पुलिस के अनुसार शनिवार 5 सितंबर को सूचना मिली कि आरोपी चन्हा से हैदरगंज की ओर जाने वाले संपर्क मार्ग से गुजर रहा है। सूचना पर एसओजी और थाना भीटी पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आरोपी की घेराबंदी शुरू कर दी।

पुलिस का दावा है कि घेराबंदी होते ही आरोपी मोटरसाइकिल से कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्ते की ओर भागने लगा। इसी दौरान मोटरसाइकिल असंतुलित होकर गिर गई। इसके बाद आरोपी बाइक छोड़कर पैदल भागा और कथित रूप से छिपकर पुलिस टीम पर फायरिंग करने लगा।

पुलिस के जवाबी फायर में पैर में लगी गोली

पुलिस के अनुसार अपनी सुरक्षा में न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग करते हुए जवाबी कार्रवाई की गई। इस दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। पुलिस टीम ने उसे तत्काल हिरासत में लेकर उपचार के लिए सीएचसी भीटी पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे/मौके से 315 बोर का एक तमंचा, दो जिंदा कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद किए जाने का दावा किया है।

मामले में पुलिस की ओर से अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। मुठभेड़ से जुड़े घटनाक्रम और बरामदगी के संबंध में नियमानुसार जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

डिस्क्लेमर:

यह खबर पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी शामिल नहीं की गई है। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और दोषसिद्धि होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।

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