चलती बस में नाबालिग से कथित दरिंदगी… अब आरोपी की मां की आंखों में आंसू, बोली—“मेरा बेटा निर्दोष है”

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली।

दिल्ली-एनसीआर में चलती स्लीपर बस के भीतर नाबालिग छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने एक बार फिर इंसानियत और महिला सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में गिरफ्तार बस चालक कुलदीप की मां सामने आई हैं। आंखों में आंसू और आवाज में बेबसी लिए उन्होंने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।

मां का कहना है कि करीब दो महीने पहले उनके पति की हत्या हुई थी और उन्हें आशंका है कि उसी पुरानी रंजिश के चलते उनके बेटे को इस मामले में फंसाया गया है। उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और दिल्ली पहुंचकर अपनी बात रखने तक के साधन नहीं हैं।

4 अगस्त की रात सामने आया था मामला

पुलिस के अनुसार, घटना 4 अगस्त की रात की है। ग्रेटर नोएडा के परी चौक से नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए बस में बैठी नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया कि बस चालक और परिचालक ने उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में सड़क किनारे उतार दिया गया।

पीड़िता के थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराया और उसके बयान के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से बस की पहचान की और बस को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा। चालक कुलदीप और परिचालक संदीप को गिरफ्तार किया गया है।

आरोपी परिवार का दावा बनाम पुलिस की जांच

जहां पुलिस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की बात कह रही है, वहीं कुलदीप का परिवार उसे निर्दोष बता रहा है। कुलदीप की मां का दावा है कि उनका बेटा किसी साजिश का शिकार हुआ है।

लेकिन इस पूरे मामले में अंतिम सच पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया से ही सामने आएगा। फिलहाल किसी आरोपी को दोषी ठहराना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा।

सबसे बड़ा सवाल—सच क्या है?

एक तरफ एक नाबालिग लड़की के लगाए गए बेहद गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी तरफ गिरफ्तार आरोपी के परिवार की ओर से उसे साजिश के तहत फंसाए जाने का दावा।

इन दावों के बीच सबसे जरूरी है कि जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों पर आधारित हो—ताकि पीड़िता को न्याय मिले और यदि किसी निर्दोष को फंसाया गया है तो उसके साथ भी अन्याय न हो।

खबर की तहतक की नजर इसी सवाल पर है—आखिर उस रात बस के भीतर क्या हुआ था और जांच के बाद सच किसके पक्ष में सामने आता है?

डिस्क्लेमर:

यह खबर उपलब्ध पुलिस जानकारी और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया गया है। आरोपी को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाना कानून का मूल सिद्धांत है। पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है।

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