खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क बस्ती, उत्तर प्रदेश वर्दी दोनों ने पहनी थी, ड्यूटी दोनों ने निभाई थी… लेकिन अब उसी वर्दी वाले घर में एक साथी हमेशा के लिए खामोश हो गया। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई महिला सिपाही की मौत की खबर ने पुलिस महकमे के साथ-साथ उनके परिवार को भी झकझोर दिया है। लालगंज थाने में तैनात महिला सिपाही केसरी वर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। उनके पति नागेंद्र वर्मा भी पुलिस विभाग में सिपाही हैं। मौत के बाद पति ने पुलिस विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पत्नी के इलाज के लिए समय पर छुट्टी मिल जाती तो शायद आज उनकी जान बच सकती थी। प्रतापगढ़ में हादसा, सिर में लगी थी चोट मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 22 अगस्त 2026 को केसरी वर्मा अपने मायके प्रतापगढ़ से ड्यूटी पर लौट रही थीं। रास्ते में हादसे में उनके सिर पर चोट लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार और सीटी स्कैन कराया गया था। इसके बाद वह बस्ती के लालगंज थाने लौट आई थीं। परिजनों और पति के मुताबिक, चोट के बाद उन्हें आगे इलाज और आराम की जरूरत थी। पति का आरोप—छुट्टी के लिए लगाई गुहार नागेंद्र वर्मा का आरोप है कि पत्नी के इलाज के लिए छुट्टी की जरूरत थी और इसके लिए आवेदन भी किया गया, लेकिन पर्याप्त छुट्टी नहीं मिल सकी। उन्होंने एसपी कार्यालय के कर्मचारियों पर भी छुट्टी न देने का आरोप लगाया और मामले में कार्रवाई की मांग की। इसके बाद अचानक केसरी की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पत्नी की मौत के बाद पति नागेंद्र का दर्द पोस्टमार्टम हाउस पर फूट पड़ा और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। सवाल कई हैं, जवाब जांच से मिलेगा इस दर्दनाक घटना ने पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य, चिकित्सा अवकाश और मानवीय परिस्थितियों में विभागीय संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लेकिन यह भी जरूरी है कि पति द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम सत्य न माना जाए। पुलिस अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि हादसे के बाद केसरी का उपचार कराया गया था और उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और जांच से स्पष्ट होने की बात कही गई है। एक परिवार के लिए यह सिर्फ एक मौत नहीं है—यह उस साथी का हमेशा के लिए चले जाना है, जिसके साथ जिंदगी और ड्यूटी दोनों बांटी गई थीं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या समय पर बेहतर इलाज और चिकित्सा अवकाश मिलता तो कहानी कुछ और होती? इसका जवाब भावनाओं से नहीं, निष्पक्ष जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही सामने आना चाहिए। डिस्क्लेमर: यह खबर विभिन्न प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों, पुलिस के पक्ष और मृतका के पति द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। छुट्टी न मिलने को मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण अभी आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारण तथा किसी स्तर पर लापरवाही की स्थिति स्पष्ट होगी। **“खबर की तहतक” किसी अधिकारी या व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता।** Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Like this:Like Loading… Related Post navigation जलालपुर पुलिस की कार्रवाई: आर्म्स एक्ट के मुकदमे में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार रीलबाजी का शौक जो न करा दे! घायल महिला को गोद में लेकर दौड़े इंस्पेक्टर, पीछे ‘हौले-हौले’ चलती रही पुलिस की गाड़ी