बंदीपुर बाजार में कथित क्लिनिक के संचालन पर उठे सवाल, पंजीकरण और चिकित्सकीय योग्यता की जांच की मांग

खबर की तहतक न्यूज नेटवर्क

भियाँव/अंबेडकरनगर।

भियाँव ब्लॉक क्षेत्र के बंदीपुर बाजार में ‘नेशनल चाइल्ड क्लिनिक’ नाम से संचालित बताए जा रहे एक क्लिनिक को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यहां नवजात एवं छोटे बच्चों का उपचार किया जा रहा है, जबकि क्लिनिक के पंजीकरण, संचालक की चिकित्सकीय योग्यता और उपचार की वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

स्थानीय लोगों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि क्लिनिक में बच्चों को इंजेक्शन और विभिन्न दवाएं दी जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य विभाग मौके पर जांच कर यह स्पष्ट करे कि संबंधित प्रतिष्ठान किस श्रेणी में पंजीकृत है, वहां उपचार करने वाले व्यक्ति की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता क्या है और क्या उसे बच्चों के उपचार का विधिक अधिकार प्राप्त है।

स्थानीय स्तर पर क्लिनिक के संचालन से जुड़े व्यक्ति के रूप में डीपी यादव का नाम सामने आ रहा है। उनके चिकित्सकीय पंजीकरण, योग्यता और क्लिनिक के वैध दस्तावेजों के संबंध में भी संबंधित विभाग से आधिकारिक पुष्टि अपेक्षित है। बिना विभागीय सत्यापन के किसी व्यक्ति को डॉक्टर या झोलाछाप चिकित्सक कहना उचित नहीं होगा।

स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग

मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों तक पहुंचाए जाने की बात कही गई है। बताया गया कि जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग मौके पर पहुंचकर क्लिनिक के दस्तावेजों, चिकित्सकीय स्टाफ की योग्यता, दवाओं के इस्तेमाल और उपचार की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच करता है या नहीं।

विशेष रूप से नवजात और बच्चों के उपचार से जुड़े मामलों में चिकित्सकीय योग्यता तथा निर्धारित मानकों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि क्लिनिक बिना आवश्यक पंजीकरण या अधिकृत चिकित्सकीय व्यवस्था के संचालित पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल यह मामला स्थानीय आरोपों और शिकायतों पर आधारित है। क्लिनिक के अवैध या वैध होने तथा वहां उपचार करने वाले व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता के संबंध में अंतिम स्थिति सक्षम स्वास्थ्य विभाग की जांच और उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों से ही स्पष्ट होगी।

सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग कब मौके पर जांच करेगा और क्या संबंधित क्लिनिक के पंजीकरण, चिकित्सकीय योग्यता एवं उपचार व्यवस्था की स्थिति सार्वजनिक की जाएगी? क्षेत्र के लोगों को अब विभागीय जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

डिस्क्लेमर:

इस समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी/शिकायतों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। समाचार प्रकाशित किए जाने तक संबंधित आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। किसी व्यक्ति, संस्था या प्रतिष्ठान को दोषी ठहराना इस समाचार का उद्देश्य नहीं है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। पाठकों से अनुरोध है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सक्षम विभाग की जांच एवं आधिकारिक अभिलेखों को आधार बनाएं।

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